शहर की उमस भरी दोपहर पिया के बदन को पसीने से तर कर रही थी। बीस साल की उम्र, और अब तक की जिंदगी एक बंद पिंजरे जैसी रही थी। उसके माता-पिता ने उसे दुनिया की हर बुराई से बचाने के नाम पर उसे एक ऐसी घुटन में रखा था जहाँ सांस लेना भी गुनाह लगता था। लेकिन आज, कॉलेज के बहाने मिले इस शहर ने उसे एक नया मौका दिया था। उसने अपने घर की उन सख्त जंजीरों को पीछे छोड़ दिया था, और अब उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी—एक ऐसी भूख जिसे उसने सालों से दबाकर रखा था।
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