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Pia ne khoja flat

शहर की उमस भरी दोपहर पिया के बदन को पसीने से तर कर रही थी। बीस साल की उम्र, और अब तक की जिंदगी एक बंद पिंजरे जैसी रही थी। उसके माता-पिता ने उसे दुनिया की हर बुराई से बचाने के नाम पर उसे एक ऐसी घुटन में रखा था जहाँ सांस लेना भी गुनाह लगता था। लेकिन आज, कॉलेज के बहाने मिले इस शहर ने उसे एक नया मौका दिया था। उसने अपने घर की उन सख्त जंजीरों को पीछे छोड़ दिया था, और अब उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी—एक ऐसी भूख जिसे उसने सालों से दबाकर रखा था।

पिया का शरीर किसी तराशे हुए संगमरमर जैसा था, लेकिन उसमें एक जंगलीपन था। उसका सीना 36 इंच का था, जो उसके टाइट टॉप के अंदर इस कदर कसा हुआ था कि कपड़ा किसी भी वक्त फट सकता था। जब वह चलती, तो उसके भारी स्तन एक लय में डोलते, जैसे वे बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे हों। उसकी कमर मात्र 28 इंच की थी, जो ऊपर से नीचे तक एक सुडौल ढलान बनाती थी और फिर अचानक 38 इंच के उन भारी कूल्हों में तब्दील हो जाती थी जो किसी गुब्बारे की तरह ऊपर की ओर उठे हुए थे। उसकी चाल में एक स्वाभाविक लचक थी, जो किसी भी देखने वाले की धड़कनें बढ़ा दे।

घर से निकलने से पहले, वॉशरूम के उस छोटे से आईने के सामने खड़े होकर पिया ने एक गहरा सांस लिया। उसने धीरे से अपनी ब्रा की हुक खोली और फिर अपनी रेशमी पैंटी को नीचे सरकाया। उसने उन दोनों कपड़ों को मोड़कर अपने बैग के सबसे निचले हिस्से में ठूंस दिया। अब उसके शरीर और कपड़ों के बीच कुछ नहीं था। वह जानती थी कि वह क्या कर रही है। वह जानती थी कि एक मिडिल क्लास लड़की के लिए इस महंगे शहर में पीजी ढूंढना नामुमकिन के बराबर है, लेकिन उसे पैसों से ज्यादा कुछ और चाहिए था—एक ऐसा रोमांच जो उसे उसकी पुरानी जिंदगी से पूरी तरह काट दे।

वह उस पते पर पहुँची जहाँ एक मकान मालिक ने ऊपरी मंजिल किराए पर देने का विज्ञापन दिया था। उसने दरवाजे पर दस्तक दी।

दरवाजा खुला और सामने शौर्या खड़ा था। उनतीस साल का इंजीनियर, जिसकी आंखों में एक गहरी स्थिरता थी, लेकिन जैसे ही उसकी नजर पिया पर पड़ी, वह स्थिरता एक झटके में गायब हो गई। उसकी पुतलियां फैल गईं और उसकी नजरें पिया के चेहरे से उतरकर उसके उभरे हुए सीने और फिर उसकी छोटी स्कर्ट की ओर गईं।

पीछे से एक औरत की आवाज गूंजी, "शौर्या, कौन है?"

शौर्या की आवाज थोड़ी लड़खड़ाई, "कोई नहीं माँ, बस एक रूम देखने आई है। मैं अभी आया, उसे दिखा कर।"

उसने पिया की ओर देखा और एक हल्का सा इशारा किया। दोनों ऊपर की सीढ़ियों की ओर बढ़े। पिया जानबूझकर आगे चल रही थी। हर कदम के साथ उसके भारी कूल्हे ऊपर-नीचे उछल रहे थे, और वह छोटी स्कर्ट उसकी जांघों के ऊपरी हिस्से को मुश्किल से ढक पा रही थी। शौर्या पीछे था, और उसकी नजरें उस नज़ारे पर जमी थीं। उसकी पैंट के अंदर उसका लिंग उत्तेजना से तन गया था, जो कपड़े को धक्का दे रहा था।

पिया ने महसूस किया कि पीछे से आने वाली सांसें भारी हो रही हैं। उसने अचानक पीछे मुड़कर देखा और एक शरारती मुस्कान के साथ जानबूझकर पैर फिसलाने का नाटक किया।

"आह!"

वह पीछे की ओर गिरी और शौर्या ने उसे बचाने के लिए फुर्ती से पकड़ा। इस अफरा-तफरी में पिया का हाथ सीधे शौर्या के तने हुए लिंग पर जा टिका, जबकि शौर्या का एक हाथ उसके भारी स्तनों के ठीक ऊपर जम गया था। दोनों की सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। पिया ने अपनी आंखों में एक चमक लाते हुए उसे देखा।

"ओह, आई एम सॉरी!"

उसने धीरे से अपना हाथ हटाया और खुद को संभालते हुए आगे बढ़ गई, लेकिन उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो बता रही थी कि यह 'गलती' बिल्कुल जानबूझकर की गई थी।

शौर्या अब पूरी तरह से उसके प्रभाव में था। उसने ऊपर का फ्लैट खोला। वह एक आलीशान 3 BHK फ्लैट था, जिसमें सफेद दीवारें और आधुनिक फर्नीचर था। पिया ने चारों ओर देखा। वह जानती थी कि वह इस जगह का किराया कभी नहीं दे पाएगी। वह मुड़ी और बाहर जाने का नाटक करने लगी।

"सॉरी, आपका फ्लैट तो बहुत बड़ा और सुंदर है। गार्ड भैया ने बोला था कि यह स्टूडेंट्स के लिए है, इसलिए मैं आ गई। मुझे लगता है कि मैं इसे अफोर्ड नहीं कर पाऊंगी। आपका समय बर्बाद हुआ, सॉरी।"

वह जैसे ही मुड़ी, शौर्या की नजरें फिर से उसके कूल्हों पर टिक गईं। वह अपनी ही लार निगल रहा था। उसकी उत्तेजना अब बर्दाश्त से बाहर थी।

"रुकिए!"

शौर्या की आवाज भारी और हांफती हुई थी।

"आप... आप जो भी देंगी, वह चलेगा। आप यहाँ रह सकती हैं।"

पिया रुकी और धीरे से मुड़ी। उसने शौर्या की आंखों में वह भूख देखी जो वह ढूंढ रही थी। वह अंदर चली गई। किचन बड़ा और चमकदार था। उसने नल खोलकर पानी चेक किया और फिर पलटकर शौर्या को देखा।

"आपके मम्मी-पापा नहीं आएंगे ऊपर?"

शौर्या ने तुरंत जवाब दिया, "नहीं, उनके घुटनों में दर्द रहता है और उन्होंने अपना दरवाजा बंद कर लिया है। कोई दिक्कत नहीं होगी।"

शौर्या समझ चुका था कि पिया यहाँ सिर्फ कमरा देखने नहीं आई है। वह मास्टर बेडरूम की ओर बढ़ी। वहाँ एक बड़ा सा शीशा था और एक बेड, जिस पर अभी गद्दा नहीं बिछा था। एक बड़ी बालकनी से शहर का नजारा दिख रहा था। शौर्या उसके करीब आया, उसके और पिया के बीच अब महज कुछ इंच का फासला था।

तभी पिया ने जानबूझकर अपना बैग जमीन पर गिरा दिया। दोनों एक साथ उसे उठाने के लिए झुके। जब पिया बैग उठा रही थी, उसने अपने भारी कूल्हों को शौर्या के चेहरे के एकदम करीब लाकर एक हल्का सा धक्का दिया। वह अहसास इतना तीव्र था कि शौर्या की सांसें रुक गईं।

वे वापस लिविंग रूम में आए। पिया ने अब अपनी चाल बदली, वह थोड़ी उदास दिखने लगी।

"यहाँ तो फर्नीचर भी नहीं है। मैं कैसे रहूंगी? मेरे पास तो कोई सामान भी नहीं है। क्या मैं बिना गद्दे के सोऊंगी? मुझे लगता है मुझे किसी और जगह देखना चाहिए।"

वह फिर से जाने लगी, लेकिन इस बार शौर्या ने उसका हाथ मजबूती से पकड़ लिया। उसकी पकड़ में एक अधिकार था।

"कल तक सब सेट हो जाएगा। आज रात... आज रात आप मेरी बाहों में सो जाना।"

पिया खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसकी हंसी में एक कामुकता थी। उसने अपनी छोटी स्कर्ट को थोड़ा और ऊपर खींचा। उसकी टॉप के बटन अब उसके स्तनों के दबाव से खींच रहे थे।

"मेरा यह पहली बार है," पिया ने फुसफुसाते हुए कहा, "मैं पेमेंट भी रात में ही करूँगी, फुल। अभी आप थोड़ा एडवांस ले लीजिए।"

शौर्या किसी भूखे जानवर की तरह उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। वह पिया के घुटनों तक लंबे बालों, उसके चेहरे की मासूमियत और उसके शरीर के उस घातक कर्व को देख रहा था। पिया भी धीरे से उसके सामने बैठ गई। जैसे ही वह बैठी, उसकी छोटी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर चढ़ गई।

शौर्या की आंखें फटी की फटी रह गईं। पिया ने कोई अंडरवियर नहीं पहना था। उसकी गुलाबी, गीली और साफ चूत शौर्या के ठीक सामने खुली पड़ी थी। शौर्या ने बिना सोचे अपना हाथ बढ़ाया और अपनी दो उंगलियों से उसकी चूत के होंठों को छुआ।

पिया के मुंह से एक हल्की आह निकली और वह हंसने लगी। शौर्या ने अपनी उंगलियों को उसकी क्लीटोरिस पर रगड़ना शुरू किया। पिया का शरीर कांपने लगा और वह खुशी से खिलखिला उठी। शौर्या ने अब अपने दोनों हाथों से उसकी चूत को फैलाया और चारों उंगलियां एक साथ उसके अंदर धकेल दीं।

"आह्ह्ह! शौर्या!"

पिया की कमर ऊपर की ओर उठी और वह जमीन पर पैर फैलाकर गिर गई। शौर्या ने एक हाथ उसकी चूत में चलाते हुए दूसरे हाथ से उसकी टॉप के बटन खोलना शुरू किया। जैसे ही आखिरी बटन टूटा, उसके दो विशाल स्तन बाहर उछले। वे इतने भारी और गोल थे कि शौर्या के हाथों में समा नहीं रहे थे। वे हिल रहे थे, कांप रहे थे।

शौर्या ने उसकी चूत में उंगली को जोर से रगड़ा और उसकी आंखों में देखते हुए पूछा, "पहले से रंडी है या बनने आई है?"

पिया ने हांफते हुए जवाब दिया, "पहले से हूँ... लेकिन अब असली वाली बनने आई हूँ।"

शौर्या जोर से हंसा। "माँ-बाप को मैं संभाल लूंगा, लेकिन मेरी सीट बुक होनी चाहिए।"

पिया ने सहमति में सिर हिलाया।

"चल, अब घोड़ी बन जा," शौर्या ने आदेश दिया।

जैसे ही पिया मुड़ी और अपने हाथों को जमीन पर टिकाकर अपनी कमर को नीचे झुकाया, शौर्या पागल हो गया। उसने अपनी जिंदगी में इतने उभरे हुए और भारी कूल्हे नहीं देखे थे। उसने उन दोनों गालों को अपने हाथों में जकड़ा और पूरी ताकत से एक जोरदार थप्पड़ मारा।

चटाक!

पिया के मुंह से एक चीख निकली, जिसमें दर्द और मजा दोनों घुले हुए थे।

चटाक! चटाक! चटाक!

शौर्या ने एक के बाद एक थप्पड़ मारना शुरू किया। पिया के सफेद कूल्हे अब धीरे-धीरे लाल होने लगे थे। वह रो रही थी, लेकिन उसकी चूत से पानी बह रहा था जो जमीन को गीला कर रहा था। शौर्या का एक हाथ अब भी उसकी चूत को बेरहमी से रगड़ रहा था, जिससे वह हिस्सा पूरी तरह लाल और सूजा हुआ महसूस हो रहा था।

तभी अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई।

पिया डर के मारे जम गई। शौर्या ने उसे शांत रहने का इशारा किया और उठकर दरवाजा खोलने गया। बाहर गार्ड खड़ा था।

"साहब, आपकी माँ पूछ रही हैं कि क्या उन्हें कमरा पसंद आया? क्या उनके लिए चाय बनाऊं?"

शौर्या ने सामान्य होने की कोशिश की, "नहीं, उन्हें कमरा पसंद है लेकिन वह चाय नहीं पियेंगी। हम यहाँ फर्नीचर और रजिस्ट्री की बात कर रहे हैं, ऊपर व्यस्त हैं।"

गार्ड के जाते ही शौर्या वापस मुड़ा। उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी।

"कौन था?" पिया ने धीमी आवाज में पूछा।

"कोई नहीं मेरी जान, अब लेट जाओ," शौर्या ने कहा।

पिया बिना गद्दे वाले बेड पर लेट गई। घबराहट और डर की वजह से उसकी चूत थोड़ी सूख गई थी। शौर्या ने अपनी हथेली पर थूका और उसे पिया की चूत पर मल दिया। फिर उसने अपने तने हुए, मोटे लिंग को उसके होंठों पर रगड़ना शुरू किया। इस बार समय कम था, इसलिए उसने उसके स्तन नहीं खोले।

"डाल कर बुकिंग कन्फर्म कर दूं?" शौर्या ने उसके कान में फुसफुसाया।

पिया ने बस सिर हिलाया। अगले ही पल, बिना किसी चेतावनी के, शौर्या ने एक ही झटके में अपना पूरा लिंग पिया की तंग चूत के अंदर धकेल दिया।

"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!"

पिया की आंखों से आंसू निकल आए। उसका शरीर एक झटके से ऊपर उठा। वह दर्द था, लेकिन वह दर्द उसे एक ऐसी तृप्ति दे रहा था जिसे उसने कभी महसूस नहीं किया था। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि शौर्या को ऐसा लगा जैसे वह किसी गर्म मखमल के अंदर जा रहा हो।

शौर्या ने बेरहमी से उसे ठोकना शुरू किया। हर प्रहार के साथ पिया के स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। वह रो रही थी, कराह रही थी, लेकिन वह रुकना नहीं चाहती थी।

"इतनी टाइट है रंडी... आखिरी बार कब किया था?" शौर्या ने उसे झकझोरते हुए पूछा।

पिया ने कुछ बोलने की कोशिश की, लेकिन शौर्या ने एक हाथ से उसकी चूत को और जोर से रगड़ा और दूसरे हाथ से उसके भारी स्तनों को इतनी जोर से खींचा जैसे वह कोई रबड़ हो।

"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! छोड़ो... आह्ह्ह!" पिया चिल्लाई, "वह... मैं पिछले साल स्कूल में... आह्ह्ह्ह!"

"स्कूल से ही सीख कर आई है!" शौर्या ने दहाड़ते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी।

वह उसे इतनी जोर से ठोक रहा था कि पूरा बेड चरमरा रहा था। पिया का शरीर पूरी तरह से उसके नीचे दब गया था। उसकी चूत से पानी की फुहारें निकल रही थीं, वह पूरी तरह से स्क्वर्ट कर रही थी। शौर्या ने कोई दया नहीं दिखाई; वह बस अपनी भूख मिटा रहा था।

जब शौर्या को लगा कि वह चरम पर पहुँचने वाला है, उसने अपना लिंग एक झटके से बाहर निकाला। पिया अभी भी हांफ रही थी, उसकी आंखें आधी खुली थीं। शौर्या ने अपना लिंग उसके मुंह के पास लाया और सारा गाढ़ा, सफेद स्पर्म उसके चेहरे और मुंह में छोड़ दिया।

पिया ने उसे पूरी तरह से चाट लिया, जैसे वह कोई कीमती इनाम हो।

जब वे दोनों उठे, तो कमरे में केवल उनकी भारी सांसों की आवाज थी। उन्होंने अपने कपड़े पहने और पिया चुपचाप वहां से चली गई।

अगले दिन, जब पिया वापस आई, तो उसने देखा कि कमरा पूरी तरह तैयार था। नया गद्दा, जरूरी फर्नीचर और उसकी जरूरत का हर सामान वहां मौजूद था। वह अब इस घर में शिफ्ट हो गई थी—एक किराएदार के रूप में नहीं, बल्कि शौर्या की उस गुप्त रंडी के रूप में, जिसकी हर जरूरत और हर इच्छा अब उस एक कमरे और उस एक मर्द के इर्द-गिर्द सिमट गई थी।

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