सूरज की पहली किरण ने कमरे में दस्तक दी थी, लेकिन मैं गहरी नींद और थकान के बोझ तले दबी हुई थी। मेरा शरीर बेजान था, जैसे किसी ने निचोड़ लिया हो। मैं बिना कपड़ों के बिस्तर पर पसरी हुई थी, मेरी त्वचा पर कल रात के निशानों की गवाही थी। तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और शौर्य अंदर दाखिल हुआ। उसके भारी जूतों की आवाज़ ने मेरी नींद तोड़ी, लेकिन मैं उठने की स्थिति में नहीं थी।
शौर्य सीधे बिस्तर के पास आया। उसकी नज़रें मेरे नग्न शरीर पर घूमीं। उसने मेरी हालत देखी और उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। वह जान गया था कि कल रात ध्रुव ने मुझे किस तरह इस्तेमाल किया था।
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